अनुप्रास अलंकार की परिभाषा लिखिए?

सवाल: अनुप्रास अलंकार की परिभाषा लिखिए?
जवाब: अनुप्रास अलंकार हिंदी साहित्य में एक प्रमुख अलंकार है, जिसमें किसी काव्य या पद्य में एक विशेष वर्ण या ध्वनि की पुनरावृत्ति होती है, जिससे उसकी शोभा और भी बढ़ जाती है। इसका प्रयोग कविता या श्लोक में एक विशेष प्रभाव पैदा करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, ‘मधुर मधुर मेरे दीपक जल’ – यहाँ ‘म’ ध्वनि की पुनरावृत्ति से अनुप्रास अलंकार का सृजन होता है। इस अलंकार का प्रयोग कविता को एक लयात्मकता और संगीतात्मकता प्रदान करता है, जिससे पाठक या श्रोता पर एक गहरा प्रभाव पड़ता है। अनुप्रास अलंकार के विभिन्न प्रकार भी होते हैं, जैसे छेकानुप्रास, वृत्त्यनुप्रास, श्रुत्त्यनुप्रास, लाटानुप्रास, और अन्त्यानुप्रास, जो विभिन्न संदर्भों में वर्णों की पुनरावृत्ति के आधार पर निर्धारित होते हैं।

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